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श्लोक 2.11.17  |
इति देवी महेष्वासं परिगृह्याभिशस्य च।
तत: परमुवाचेदं वरदं काममोहितम्॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार काम से मोहित होकर महाधनुर्धर राजा दशरथ को मुट्ठी में लेकर वर देने के लिए तत्पर देवी कैकेयी ने पहले उनकी स्तुति की और फिर इस प्रकार कहा -॥17॥ |
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| Having thus taken the great archer King Dasharatha in her fist and ready to grant a boon, captivated by lust, Goddess Kaikeyi first praised him and then said thus -॥17॥ |
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