|
| |
| |
श्लोक 2.11.10  |
बलमात्मनि पश्यन्ती न विशङ्कितुमर्हसि।
करिष्यामि तव प्रीतिं सुकृतेनापि ते शपे॥ १०॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| ‘मेरा बल देखकर भी तुम्हें मुझ पर संदेह नहीं करना चाहिए। मैं अपने पुण्यकर्मों की शपथ लेकर कहता हूँ कि मैं तुम्हारा अभीष्ट कार्य अवश्य पूरा करूँगा।’॥10॥ |
| |
| ‘You should not doubt me even after seeing my strength. I swear by my good deeds that I will definitely accomplish your desired task.'॥ 10॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|