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ramayan 2.109.9: यदि मैं आपके बताए हुए मार्ग पर चलूँगा, तो पहले मैं स्वेच्छाचारी हो जाऊँगा। फिर यह सारा जगत स्वेच्छाचारी हो जाएगा; क्योंकि प्रजा भी वैसा ही आचरण करने लगेगी जैसा राजा करते हैं॥9॥   |   ramayan सर्ग 2.109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.109.9 
कामवृत्तोऽन्वयं लोक: कृत्स्न: समुपवर्तते।
यद‍्धृत्ता: सन्ति राजानस्तद्‍वृत्ता: सन्ति हि प्रजा:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं आपके बताए हुए मार्ग पर चलूँगा, तो पहले मैं स्वेच्छाचारी हो जाऊँगा। फिर यह सारा जगत स्वेच्छाचारी हो जाएगा; क्योंकि प्रजा भी वैसा ही आचरण करने लगेगी जैसा राजा करते हैं॥9॥
 
‘If I follow the path shown by you, first I will become self-willed. Then this whole world will become self-willed; because the subjects also start behaving in the same way as the kings behave.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)