Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.109.4: ‘आचरण ही हमें बताता है कि कौन श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न हुआ है और कौन नीच कुल में, कौन शूरवीर है और कौन अनावश्यक रूप से अपने को पुरुष समझता है, कौन पवित्र है और कौन अपवित्र है?॥4॥ | ramayan सर्ग 2.109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुलीनमकुलीनं वा वीरं पुरुषमानिनम्।
चारित्रमेव व्याख्याति शुचिं वा यदि वाशुचिम्॥ ४॥
अनुवाद
‘आचरण ही हमें बताता है कि कौन श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न हुआ है और कौन नीच कुल में, कौन शूरवीर है और कौन अनावश्यक रूप से अपने को पुरुष समझता है, कौन पवित्र है और कौन अपवित्र है?॥4॥
‘It is conduct that tells us who is born in a noble family and who in a lowly family, who is a valiant man and who unnecessarily considers himself a man, who is pure and who is impure?॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥