Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.109.35: 'तुम्हारे अतिरिक्त पूर्वकाल के श्रेष्ठ ब्राह्मणों ने इस लोक और परलोक के फल की इच्छा का त्याग करके वेदों को ही धर्म मानकर सदैव अनेक शुभ कर्म किए हैं। अतः जो कोई ब्राह्मण है, वह वेदों को ही प्रमाण मानकर स्वस्ति (अहिंसा और सत्य आदि), कृत (तप, दान और पुण्य आदि) और हुत (यज्ञ-यज्ञ आदि) कर्म करता है।' 35॥ | ramayan सर्ग 2.109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'तुम्हारे अतिरिक्त पूर्वकाल के श्रेष्ठ ब्राह्मणों ने इस लोक और परलोक के फल की इच्छा का त्याग करके वेदों को ही धर्म मानकर सदैव अनेक शुभ कर्म किए हैं। अतः जो कोई ब्राह्मण है, वह वेदों को ही प्रमाण मानकर स्वस्ति (अहिंसा और सत्य आदि), कृत (तप, दान और पुण्य आदि) और हुत (यज्ञ-यज्ञ आदि) कर्म करता है।' 35॥
'Apart from you, the earlier great Brahmins have always performed many auspicious deeds considering the Vedas as the religion, renouncing the desire for the fruits of this world and the next world. Therefore, whoever is a Brahmin, considering the Vedas as the proof, performs Swasti (non-violence and truth etc.), Krita (penance, charity and charity etc.) and Hut (yajna-sacrifice etc.) deeds. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥