Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.109.33: 'तुम्हारी बुद्धि कुमार्ग पर स्थित है - तुमने वेदविरुद्ध मार्ग का आश्रय लिया है। तुम नास्तिक हो और धर्ममार्ग से दूर हो। मैं अपने पिता के कृत्य की निन्दा करता हूँ, जिन्होंने ऐसी पाखण्ड बुद्धि से मिथ्या विचारों का प्रचार करने वाले तुम्हें अपना पुरोहित बनाया है।॥ 33॥ | ramayan सर्ग 2.109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'तुम्हारी बुद्धि कुमार्ग पर स्थित है - तुमने वेदविरुद्ध मार्ग का आश्रय लिया है। तुम नास्तिक हो और धर्ममार्ग से दूर हो। मैं अपने पिता के कृत्य की निन्दा करता हूँ, जिन्होंने ऐसी पाखण्ड बुद्धि से मिथ्या विचारों का प्रचार करने वाले तुम्हें अपना पुरोहित बनाया है।॥ 33॥
‘Your intellect is situated on the wrong path – you have taken refuge in a path that is against the Vedas. You are an atheist and far from the path of religion. I condemn the act of my father who made you, who propagates wrong ideas with such a hypocritical intellect, his priest.॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥