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ramayan 2.109.31: 'सत्य, सदाचार, पराक्रम, सब प्राणियों पर दया, सब से मधुर वचन बोलना तथा देवताओं, अतिथियों और ब्राह्मणों का पूजन करना - इन्हें मुनियों ने स्वर्ग का मार्ग बताया है॥31॥   |   ramayan सर्ग 2.109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.109.31 
सत्यं च धर्मं च पराक्रमं च
भूतानुकम्पां प्रियवादितां च।
द्विजातिदेवातिथिपूजनं च
पन्थानमाहुस्त्रिदिवस्य सन्त:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
'सत्य, सदाचार, पराक्रम, सब प्राणियों पर दया, सब से मधुर वचन बोलना तथा देवताओं, अतिथियों और ब्राह्मणों का पूजन करना - इन्हें मुनियों ने स्वर्ग का मार्ग बताया है॥31॥
 
'Truth, virtue, valour, kindness to all creatures, speaking sweet words to everyone, and worshipping the gods, guests and brahmins - these have been described by the saints as the path to heaven.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)