Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.109.3: जो मनुष्य धर्म या वेद की मर्यादा का परित्याग कर देता है, वह पापकर्मों में प्रवृत्त होता है। उसका आचरण और विचार दोनों भ्रष्ट हो जाते हैं; इसीलिए वह सज्जनों में कभी सम्मान नहीं पाता।॥3॥ | ramayan सर्ग 2.109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निर्मर्यादस्तु पुरुष: पापाचारसमन्वित:।
मानं न लभते सत्सु भिन्नचारित्रदर्शन:॥ ३॥
अनुवाद
जो मनुष्य धर्म या वेद की मर्यादा का परित्याग कर देता है, वह पापकर्मों में प्रवृत्त होता है। उसका आचरण और विचार दोनों भ्रष्ट हो जाते हैं; इसीलिए वह सज्जनों में कभी सम्मान नहीं पाता।॥3॥
‘The person who abandons the limits of religion or Vedas, gets involved in sinful acts. Both his conduct and thoughts become corrupt; that is why he never gets respect among the good people.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥