Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.109.25: ‘मैंने अपने गुरु के समक्ष जो प्रतिज्ञा की है, वह अटूट है - उसे किसी भी प्रकार से तोड़ा नहीं जा सकता। जिस समय मैंने प्रतिज्ञा की थी, उस समय देवी कैकेयी का हृदय हर्ष से खिल उठा था॥ 25॥ | ramayan सर्ग 2.109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘मैंने अपने गुरु के समक्ष जो प्रतिज्ञा की है, वह अटूट है - उसे किसी भी प्रकार से तोड़ा नहीं जा सकता। जिस समय मैंने प्रतिज्ञा की थी, उस समय देवी कैकेयी का हृदय हर्ष से खिल उठा था॥ 25॥
‘The vow I made in the presence of my Guru is unbreakable – it cannot be broken in any way. At the time when I made the vow, Goddess Kaikeyi's heart blossomed with joy.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥