Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.109.17: 'पहले सत्य का पालन करने की प्रतिज्ञा करके अब मैं लोभ, मोह या अज्ञान के कारण विवेकशून्य होकर अपने पिता के सत्य की मर्यादा का उल्लंघन नहीं करूँगा ॥17॥ | ramayan सर्ग 2.109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नैव लोभान्न मोहाद् वा न चाज्ञानात् तमोऽन्वित:।
सेतुं सत्यस्य भेत्स्यामि गुरो: सत्यप्रतिश्रव:॥ १७॥
अनुवाद
'पहले सत्य का पालन करने की प्रतिज्ञा करके अब मैं लोभ, मोह या अज्ञान के कारण विवेकशून्य होकर अपने पिता के सत्य की मर्यादा का उल्लंघन नहीं करूँगा ॥17॥
'Having first pledged to follow the truth, now I will not violate the dignity of my father's truth by being devoid of conscience due to greed, attachment or ignorance. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥