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ramayan 2.109.15: 'एक मनुष्य सम्पूर्ण जगत् का पालन करता है, एक मनुष्य सम्पूर्ण कुल का पालन करता है, एक मनुष्य नरक में डूबता है और एक मनुष्य स्वर्ग में मोक्ष प्राप्त करता है।॥15॥   |   ramayan सर्ग 2.109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.109.15 
एक: पालयते लोकमेक: पालयते कुलम्।
मज्जत्येको हि निरय एक: स्वर्गे महीयते॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'एक मनुष्य सम्पूर्ण जगत् का पालन करता है, एक मनुष्य सम्पूर्ण कुल का पालन करता है, एक मनुष्य नरक में डूबता है और एक मनुष्य स्वर्ग में मोक्ष प्राप्त करता है।॥15॥
 
'One man sustains the whole universe, one sustains an entire clan, one drowns in hell and one attains salvation in heaven.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)