श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.109.11 
ऋषयश्चैव देवाश्च सत्यमेव हि मेनिरे।
सत्यवादी हि लोकेऽस्मिन् परं गच्छति चाक्षयम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
‘ऋषियों और देवताओं ने सदैव सत्य का आदर किया है। इस लोक में सत्यवादी मनुष्य सनातन परमधाम को जाता है।॥11॥
 
‘The sages and the gods have always respected truth. In this world, a truthful person goes to the eternal supreme abode.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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