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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 109: श्रीराम के द्वारा जाबालि के नास्तिक मत का खण्डन करके आस्तिक मत का स्थापन
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श्लोक 1
श्लोक
2.109.1
जाबालेस्तु वच: श्रुत्वा राम: सत्यपराक्रम:।
उवाच परया सूक्त्या बुद्धॺाविप्रतिपन्नया॥ १॥
अनुवाद
जाबालिका, ये वचन सुनकर महाबली श्री रामचन्द्रजी ने अपनी निःसंदेह बुद्धि से शास्त्रों का आश्रय लेकर कहा-॥1॥
Jabalika, after hearing these words, the mighty Shri Ramchandraji, with his doubtless wisdom, took the help of the scriptures and said - ॥ 1॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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