श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 108: जाबालि का नास्तिकों के मत का अवलम्बन करके श्रीराम को समझाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.108.9 
राजभोगाननुभवन् महार्हान् पार्थिवात्मज।
विहर त्वमयोध्यायां यथा शक्रस्त्रिविष्टपे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘राजकुमार! जैसे देवताओं के राजा इन्द्र स्वर्ग में विचरण करते हैं, वैसे ही आप भी अयोध्या में राजसी सुख भोगते हुए विचरण करें॥9॥
 
‘Prince! Just as the King of Gods Indra roams around in heaven, similarly you should roam around in Ayodhya enjoying the precious royal pleasures.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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