Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.108.13: 'मैं उन लोगों के लिए शोक करता हूँ जिन्होंने अपनी अर्जित भौतिक वस्तुओं का त्याग करके धर्म में लीन हो गए हैं, दूसरों के लिए नहीं। उन्होंने इस संसार में धर्म के नाम पर केवल कष्ट भोगा है और मृत्यु के बाद नष्ट हो गए हैं।' | ramayan सर्ग 2.108: जाबालि का नास्तिकों के मत का अवलम्बन करके श्रीराम को समझाना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्थधर्मपरा ये ये तांस्तान् शोचामि नेतरान्।
ते हि दु:खमिह प्राप्य विनाशं प्रेत्य लेभिरे॥ १३॥
अनुवाद
'मैं उन लोगों के लिए शोक करता हूँ जिन्होंने अपनी अर्जित भौतिक वस्तुओं का त्याग करके धर्म में लीन हो गए हैं, दूसरों के लिए नहीं। उन्होंने इस संसार में धर्म के नाम पर केवल कष्ट भोगा है और मृत्यु के बाद नष्ट हो गए हैं।'
‘I grieve for those men who have renounced the material things that they had acquired and have become devoted to religion, not for others. They have only suffered in the name of religion in this world and perished after death.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥