श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 108: जाबालि का नास्तिकों के मत का अवलम्बन करके श्रीराम को समझाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.108.11 
बीजमात्रं पिता जन्तो: शुक्रं शोणितमेव च।
संयुक्तमृतुमन्मात्रा पुरुषस्येह जन्म तत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
पिता तो जीव के जन्म का निमित्त मात्र है। वस्तुतः यहाँ पुरुष का जन्म तभी होता है जब रजस्वला माता का वीर्य और रक्त गर्भ में मिल जाते हैं।॥11॥
 
‘The father is only the instrumental cause in the birth of a living being. In reality, a man is born here only when the semen and the blood of a menstruating mother unite in the womb.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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