श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 108: जाबालि का नास्तिकों के मत का अवलम्बन करके श्रीराम को समझाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.108.10 
न ते कश्चिद् दशरथस्त्वं च तस्य च कश्चन।
अन्यो राजा त्वमन्यस्तु तस्मात् कुरु यदुच्यते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजा दशरथ तुम्हारे कुछ नहीं थे और तुम भी उनके कुछ नहीं हो। राजा भिन्न थे और तुम भी भिन्न हो; इसलिए जो मैं कहता हूँ, वही करो॥ 10॥
 
‘King Dasharath was nobody to you and you are nobody to him either. The king was different and you are also different; therefore do what I say.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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