श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 107: श्रीराम का भरत को समझाकर उन्हें अयोध्या जाने का आदेश देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.107.9 
भवानपि तथेत्येव पितरं सत्यवादिनम्।
कर्तुमर्हसि राजेन्द्र क्षिप्रमेवाभिषिञ्चनात्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'राजा! आप उनकी आज्ञा मानकर यथाशीघ्र राजा पद पर अभिषिक्त हो जाएँ और अपने पिता को सत्यवादी बना लें - यही आपके लिए उत्तम बात है॥9॥
 
'King! You should obey his orders and get yourself anointed as the king as soon as possible and make your father truthful - this is the best thing for you.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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