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श्लोक 2.107.9  |
भवानपि तथेत्येव पितरं सत्यवादिनम्।
कर्तुमर्हसि राजेन्द्र क्षिप्रमेवाभिषिञ्चनात्॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| 'राजा! आप उनकी आज्ञा मानकर यथाशीघ्र राजा पद पर अभिषिक्त हो जाएँ और अपने पिता को सत्यवादी बना लें - यही आपके लिए उत्तम बात है॥9॥ |
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| 'King! You should obey his orders and get yourself anointed as the king as soon as possible and make your father truthful - this is the best thing for you.॥ 9॥ |
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