Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.107.17: 'भरत! तुम स्वयं मनुष्यों के राजा बनो और मैं वन्य पशुओं का सम्राट बनूँगा। अब तुम बड़े आनन्द से महान नगरी अयोध्या को जाओ और मैं भी प्रसन्नतापूर्वक दण्डक वन में प्रवेश करूँगा। 17॥ | ramayan सर्ग 2.107: श्रीराम का भरत को समझाकर उन्हें अयोध्या जाने का आदेश देना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वं राजा भरत भव स्वयं नराणां
वन्यानामहमपि राजराण्मृगाणाम्।
गच्छ त्वं पुरवरमद्य सम्प्रहृष्ट:
संहृष्टस्त्वहमपि दण्डकान् प्रवेक्ष्ये॥ १७॥
अनुवाद
'भरत! तुम स्वयं मनुष्यों के राजा बनो और मैं वन्य पशुओं का सम्राट बनूँगा। अब तुम बड़े आनन्द से महान नगरी अयोध्या को जाओ और मैं भी प्रसन्नतापूर्वक दण्डक वन में प्रवेश करूँगा। 17॥
'Bharat! You yourself become the king of humans and I will become the emperor of wild animals. Now you go to the great city of Ayodhya with great joy and I too will happily enter the Dandaka forest. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥