श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 107: श्रीराम का भरत को समझाकर उन्हें अयोध्या जाने का आदेश देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.107.12 
पुन्नाम्नो नरकाद् यस्मात् पितरं त्रायते सुत:।
तस्मात् पुत्र इति प्रोक्त: पितॄन् य: पाति सर्वत:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
(यह इस प्रकार है-) पुत्र अपने पिता को पूत नामक नरक से छुड़ाता है, इसीलिए उसे पुत्र कहते हैं। वह पुत्र ही अपने पूर्वजों की सब ओर से रक्षा करता है।
 
‘(It is like this-) The son rescues his father from the hell called Put, that is why he is called a son. He is the son who protects his ancestors from all sides.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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