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ramayan 2.107.1: जब भरतजी पुनः इस प्रकार प्रार्थना करने लगे, तब लक्ष्मणजी के बड़े भाई श्रीमान् रामचन्द्रजी ने परिवार के सदस्यों के बीच आदरपूर्वक बैठकर उनसे इस प्रकार कहा -॥1॥   |   ramayan सर्ग 2.107: श्रीराम का भरत को समझाकर उन्हें अयोध्या जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 107: श्रीराम का भरत को समझाकर उन्हें अयोध्या जाने का आदेश देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.107.1 
पुनरेवं ब्रुवाणं तं भरतं लक्ष्मणाग्रज:।
प्रत्युवाच तत: श्रीमान् ज्ञातिमध्ये सुसत्कृत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब भरतजी पुनः इस प्रकार प्रार्थना करने लगे, तब लक्ष्मणजी के बड़े भाई श्रीमान् रामचन्द्रजी ने परिवार के सदस्यों के बीच आदरपूर्वक बैठकर उनसे इस प्रकार कहा -॥1॥
 
When Bharata again began to pray in this manner, Lakshmana's elder brother Sriman Ramachandra, sitting respectfully amidst the family members, replied to him thus -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)