श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.106.6 
अमरोपमसत्त्वस्त्वं महात्मा सत्यसंगर:।
सर्वज्ञ: सर्वदर्शी च बुद्धिमांश्चासि राघव॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! आप देवताओं के समान सत्त्वगुण से युक्त, महात्मा, सत्य में आस्था रखने वाले, सर्वज्ञ, सबके साक्षी और बुद्धिमान हैं॥6॥
 
'Ragunandan! Like the Gods, you are full of Sattva Guna, a Mahatma, a believer in truth, omniscient, a witness to all and intelligent. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)