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ramayan 2.106.31: मैं आपके चरणों में सिर झुकाकर आपसे प्रार्थना करता हूँ। मुझ पर दया कीजिए। जैसे महादेवजी सभी प्राणियों पर दया करते हैं, वैसे ही आप भी अपने स्वजनों पर दया कीजिए॥31॥   |   ramayan सर्ग 2.106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.106.31 
शिरसा त्वाभियाचेऽहं कुरुष्व करुणां मयि।
बान्धवेषु च सर्वेषु भूतेष्विव महेश्वर:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
मैं आपके चरणों में सिर झुकाकर आपसे प्रार्थना करता हूँ। मुझ पर दया कीजिए। जैसे महादेवजी सभी प्राणियों पर दया करते हैं, वैसे ही आप भी अपने स्वजनों पर दया कीजिए॥31॥
 
‘I bow my head at your feet and beg you. Please have mercy on me. Just like Mahadevji shows mercy on all creatures, you should also show mercy on your relatives.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)