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श्लोक  2.106.30 
आक्रोशं मम मातुश्च प्रमृज्य पुरुषर्षभ।
अद्य तत्रभवन्तं च पितरं रक्ष किल्बिषात्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे महापुरुष! आज मेरी माता पर लगे कलंक को धो डालिए और मेरे पूज्य पिताजी को निन्दा से बचाइए।' 30.
 
'O great man! Today, please wash away the stain on my mother and save my respected father from criticism.' 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)