Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.106.27: 'हमारे द्वारा अभिषिक्त होकर तुम मरुतों द्वारा अभिषिक्त इन्द्र के समान शीघ्रतापूर्वक अयोध्या की ओर प्रस्थान करो, तथा समस्त लोकों पर विजय प्राप्त करो तथा अपनी प्रजा का पालन करो।   |   ramayan सर्ग 2.106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.106.27 
अभिषिक्तस्त्वमस्माभिरयोध्यां पालने व्रज।
विजित्य तरसा लोकान् मरुद्भिरिव वासव:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'हमारे द्वारा अभिषिक्त होकर तुम मरुतों द्वारा अभिषिक्त इन्द्र के समान शीघ्रतापूर्वक अयोध्या की ओर प्रस्थान करो, तथा समस्त लोकों पर विजय प्राप्त करो तथा अपनी प्रजा का पालन करो।
 
'Having been anointed by us, you should, like Indra anointed by the Maruts, proceed with great speed to Ayodhya to conquer all the worlds and take care of your subjects.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)