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ramayan 2.106.25: ‘धर्मात्मा रघुनन्दन! पिता का यह सम्पूर्ण राज्य महान् और दोषरहित है, अतः तुम अपने बन्धु-बान्धवों सहित अपने-अपने धर्मानुसार इसका पालन करो॥25॥   |   ramayan सर्ग 2.106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.106.25 
इदं निखिलमप्यग्रयं राज्यं पित्र्यमकण्टकम्।
अनुशाधि स्वधर्मेण धर्मज्ञ सह बान्धवै:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
‘धर्मात्मा रघुनन्दन! पिता का यह सम्पूर्ण राज्य महान् और दोषरहित है, अतः तुम अपने बन्धु-बान्धवों सहित अपने-अपने धर्मानुसार इसका पालन करो॥25॥
 
‘Religionist Raghunandan! This entire kingdom of the Father is great and free from harm, hence you along with your relatives follow it according to your own dharma. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)