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चतुर्णामाश्रमाणां हि गार्हस्थ्यं श्रेष्ठमुत्तमम्।
आहुर्धर्मज्ञ धर्मज्ञास्तं कथं त्यक्तुमिच्छसि॥ २२॥
अनुवाद
'धर्मज्ञान रघुनन्दन! धर्म को जानने वाले पुरुष चारों आश्रमों में गृहस्थाश्रम को श्रेष्ठ कहते हैं, फिर आप उसे क्यों त्यागना चाहते हैं?॥ 22॥
'Dharmagyan Raghunandan! The men having knowledge of Dharma say that domestic life is the best among the four ashrams, then why do you wish to abandon it?॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥