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ramayan 2.106.19: हे महारथी! क्षत्रिय का प्रथम कर्तव्य यही है कि वह राजा के रूप में अभिषिक्त हो, जिससे वह अपनी प्रजा का भली-भाँति पालन कर सके॥19॥   |   ramayan सर्ग 2.106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.106.19 
एष हि प्रथमो धर्म: क्षत्रियस्याभिषेचनम्।
येन शक्यं महाप्राज्ञ प्रजानां परिपालनम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे महारथी! क्षत्रिय का प्रथम कर्तव्य यही है कि वह राजा के रूप में अभिषिक्त हो, जिससे वह अपनी प्रजा का भली-भाँति पालन कर सके॥19॥
 
'O great warrior! The first duty of a Kshatriya is that he should be anointed as the king so that he can take good care of his subjects.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)