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ramayan 2.106.17: 'कैकेयी, मैं, मेरे पिता, मेरे इष्ट-मित्र, मेरे सम्बन्धी, ग्रामवासी तथा राष्ट्र-जनों की रक्षा के लिए मेरी प्रार्थना स्वीकार करें। 17॥   |   ramayan सर्ग 2.106: भरत की पुनः श्रीराम से अयोध्या लौटने और राज्य ग्रहण करने की प्रार्थना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.106.17 
कैकेयीं मां च तातं च सुहृदो बान्धवांश्च न:।
पौरजानपदान् सर्वांस्त्रातुं सर्वमिदं भवान्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'कैकेयी, मैं, मेरे पिता, मेरे इष्ट-मित्र, मेरे सम्बन्धी, ग्रामवासी तथा राष्ट्र-जनों की रक्षा के लिए मेरी प्रार्थना स्वीकार करें। 17॥
 
'Please accept my prayer for the protection of Kaikeyi, I, my father, my good friends, my relatives, the villagers and the people of the nation. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)