श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 105: भरत का श्रीराम को राज्य ग्रहण करने के लिये कहना, श्रीराम का पिता की आज्ञा का पालन करने के लिये ही राज्य ग्रहण न करके वन में रहने का ही दृढ़ निश्चय बताना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.105.4 
सान्त्विता मामिका माता दत्तं राज्यमिदं मम।
तद् ददामि तवैवाहं भुङ्क्ष्व राज्यमकण्टकम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'भैया! पिता ने मेरी माता को वर देकर संतुष्ट किया और माता ने मुझे यह राज्य दिया। अब मैं यह अखण्ड राज्य आपकी सेवा में समर्पित करता हूँ। आप इसका पालन और उपभोग करें।॥4॥
 
'Brother! Father satisfied my mother by giving her a boon and mother gave me this kingdom. Now, I dedicate this uninterrupted kingdom to your service. You please maintain and enjoy it.॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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