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श्लोक 2.105.22  |
सहैव मृत्युर्व्रजति सह मृत्युर्निषीदति।
गत्वा सुदीर्घमध्वानं सह मृत्युर्निवर्तते॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| ‘मृत्यु मनुष्य के साथ चलती है, उसके साथ बैठती है, और बहुत दूर तक यात्रा करने पर भी मनुष्य के साथ ही लौटती है ॥ 22॥ |
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| ‘Death walks with the man, sits with him, and even after travelling a long distance, it returns with the man.॥ 22॥ |
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