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श्लोक 2.105.17  |
यथा फलानां पक्वानां नान्यत्र पतनाद् भयम्।
एवं नरस्य जातस्य नान्यत्र मरणाद् भयम्॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| ‘जैसे पके हुए फलों को गिरने के सिवाय और कोई भय नहीं होता, वैसे ही नवजात मनुष्यों को मृत्यु के सिवाय और कोई भय नहीं होता।॥17॥ |
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| ‘Just as ripe fruits have no fear except falling, similarly the newly born human beings have no fear except death.॥ 17॥ |
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