श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 104: श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के द्वारा माताओं की चरणवन्दना तथा वसिष्ठजी को प्रणाम करके श्रीराम आदि का सबके साथ बैठना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.104.7 
अद्यायमपि ते पुत्र: क्लेशानामतथोचित:।
नीचानर्थसमाचारं सज्जं कर्म प्रमुञ्चतु॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'तुम्हारा यह पुत्र इन दिनों जो कष्ट भोग रहा है, उसके योग्य नहीं है। अब राम लौट जाएँ और जो कष्टदायक कार्य उसके सामने प्रस्तुत है, जो केवल निम्न जाति के मनुष्यों के लिए है, उसे छोड़ दें - उसे करने का अवसर भी न मिले।'॥7॥
 
'This son of yours is not worthy of the sufferings he is having to endure these days. Now let Rama return and he should leave the painful task that is presented to him, which is only for men of the lower class - he should not even have the opportunity to do it.'॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)