श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 104: श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के द्वारा माताओं की चरणवन्दना तथा वसिष्ठजी को प्रणाम करके श्रीराम आदि का सबके साथ बैठना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.104.29 
ततो जघन्यं सहितै: स्वमन्त्रिभि:
पुरप्रधानैश्च तथैव सैनिकै:।
जनेन धर्मज्ञतमेन धर्मवा-
नुपोपविष्टो भरतस्तदाग्रजम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् धर्मात्मा भरत अपने समस्त मन्त्रियों, नगर के प्रमुख नागरिकों, सैनिकों तथा धर्मज्ञ पुरुषों के साथ अपने बड़े भाई के पीछे जाकर बैठ गये।
 
Thereafter, the virtuous Bharata, along with all his ministers, the chief citizens of the city, his soldiers and the men greatly versed in religion, went and sat behind his elder brother.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)