श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 104: श्रीराम, लक्ष्मण और सीता के द्वारा माताओं की चरणवन्दना तथा वसिष्ठजी को प्रणाम करके श्रीराम आदि का सबके साथ बैठना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.104.11 
तस्य देवसमानस्य पार्थिवस्य महात्मन:।
नैतदौपयिकं मन्ये भुक्तभोगस्य भोजनम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'देवता के समान तेजस्वी उस महान राजा ने अनेक प्रकार के स्वादिष्ट भोजन का आनंद लिया है। मैं इस भोजन को उसके लिए उपयुक्त नहीं समझता हूँ॥ 11॥
 
'That great king, who is as radiant as a god, has enjoyed many kinds of delicious food. I do not consider this food to be appropriate for him.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)