श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.103.9 
किं नु तस्य मया कार्यं दुर्जातेन महात्मन:।
यो मृतो मम शोकेन स मया न च संस्कृत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'हाय! मैं अपने पिता का अन्तिम संस्कार भी नहीं कर सका, जो मेरे शोक के कारण मर गए। मुझ जैसे व्यर्थ ही जन्मे पुत्र को पाकर उस महान पिता का कौन-सा कार्य सिद्ध हुआ?॥9॥
 
'Alas! I could not even perform the last rites of my father who died because of my grief. What work of that great father was accomplished by having a son like me who was born in vain?॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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