श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.103.8 
किं करिष्याम्ययोध्यायां ताते दिष्टां गतिं गते।
कस्तां राजवराद्धीनामयोध्यां पालयिष्यति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भैया! अब मेरे पिता का देहांत हो गया है, तो मैं अयोध्या में क्या करूँगा? अब उस अयोध्या की देखभाल कौन करेगा जिसने अपने राजपिता को खो दिया है?
 
Brother! Now that my father has passed away, what will I do in Ayodhya? Who will now take care of Ayodhya that has lost its royal father?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)