श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.103.43 
रथाह्वहंसानत्यूहा: प्लवा: कारण्डवा: परे।
तथा पुंस्कोकिला: क्रौञ्चा विसंज्ञा भेजिरे दिश:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
चक्रवाक, हंस, जलपक्षी, वाक्, करण्डव, नरकाकील और क्रौंच पक्षी मूर्च्छित होकर भिन्न-भिन्न दिशाओं में उड़ गए ॥43॥
 
Chakravaka, swan, waterfowl, vaka, karandava, narkokil and krauncha birds lost consciousness and flew away in different directions. 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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