| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन » श्लोक 42 |
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| | | | श्लोक 2.103.42  | वराहवृकसिंहाश्च महिषा: सृमरास्तथा।
व्याघ्रगोकर्णगवया वित्रेसु: पृषतै: सह॥ ४२॥ | | | | | | अनुवाद | | सूअर, भेड़िये, शेर, भैंस, श्रामर (एक प्रकार का हिरण), बाघ, गोकर्ण (एक प्रकार का हिरण) और गवय (नील सांड), साथ ही चित्तीदार हिरण भी भयभीत हो गए। | | | | Boars, wolves, lions, buffaloes, sramara (a type of deer), tigers, gokarna (a type of deer) and gavaya (blue bull), along with the spotted deer, became frightened. | | ✨ ai-generated | | |
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