श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.103.39 
भ्रातॄणां त्वरितास्ते तु द्रष्टुकामा: समागमम्।
ययुर्बहुविधैर्यानै: खुरनेमिसमाकुलै:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
चारों भाइयों का मिलन देखने की इच्छा से वे लोग खुरों और पहियों से सुसज्जित नाना प्रकार के वाहनों पर सवार होकर बड़ी शीघ्रता से चल पड़े।
 
Desiring to see the meeting of the four brothers, they set out in great haste on various kinds of vehicles fitted with hooves and wheels. 39.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas