श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.103.33 
तेषां तु रुदतां शब्दात् प्रतिशब्दोऽभवद् गिरौ।
भ्रातॄणां सह वैदेह्या सिंहानां नर्दतामिव॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
सीता सहित चारों भाइयों का विलाप उस पर्वत पर सिंहों की गर्जना के समान गूँज रहा था।
 
The wailing of the four brothers along with Sita echoed on that mountain like the roaring of lions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)