vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन
»
श्लोक 19
श्लोक
2.103.19
सान्त्वयित्वा तु तां रामो रुदतीं जनकात्मजाम्।
उवाच लक्ष्मणं तत्र दु:खितो दु:खितं वच:॥ १९॥
अनुवाद
तत्पश्चात् शोकग्रस्त राम ने रोती हुई जनकपुत्री को सांत्वना देकर अत्यन्त दुःखी लक्ष्मण से कहा -
Thereafter, after consoling the weeping daughter of Janaka, the grief-stricken Rama said to the extremely sad Lakshmana -
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas