vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन
»
श्लोक 14
श्लोक
2.103.14
एवमुक्त्वाथ भरतं भार्यामभ्येत्य राघव:।
उवाच शोकसंतप्त: पूर्णचन्द्रनिभाननाम्॥ १४॥
अनुवाद
भरत से ऐसा कहकर शोकग्रस्त श्री रामजी अपनी पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर मुख वाली पत्नी के पास आकर बोले - ॥14॥
Having said this to Bharat, the grief-stricken Sri Rama came to his wife whose face was as beautiful as the full moon and said - ॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×