श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम आदि का विलाप, पिता के लिये जलाञ्जलि-दान, पिण्डदान और रोदन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.103.14 
एवमुक्त्वाथ भरतं भार्यामभ्येत्य राघव:।
उवाच शोकसंतप्त: पूर्णचन्द्रनिभाननाम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
भरत से ऐसा कहकर शोकग्रस्त श्री रामजी अपनी पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर मुख वाली पत्नी के पास आकर बोले - ॥14॥
 
Having said this to Bharat, the grief-stricken Sri Rama came to his wife whose face was as beautiful as the full moon and said - ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)