श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 102: भरत का पुनः श्रीराम से राज्य ग्रहण करने का अनुरोध करके उनसे पिता की मृत्यु का समाचार बताना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.102.3 
स समृद्धां मया सार्धमयोध्यां गच्छ राघव।
अभिषेचय चात्मानं कुलस्यास्य भवाय न:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अतः हे रघुनन्दन! आप मेरे साथ समृद्ध अयोध्या नगरी में आइए और हमारे कुल की समृद्धि के लिए राजा पद पर अभिषिक्त हो जाइए॥3॥
 
‘Therefore, Raghunandan! Come with me to the prosperous city of Ayodhya and get yourself anointed as the king for the prosperity of our clan.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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