श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 102: भरत का पुनः श्रीराम से राज्य ग्रहण करने का अनुरोध करके उनसे पिता की मृत्यु का समाचार बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.102.1 
रामस्य वचनं श्रुत्वा भरत: प्रत्युवाच ह।
किं मे धर्माद् विहीनस्य राजधर्म: करिष्यति॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के वचन सुनकर भरत ने इस प्रकार उत्तर दिया - 'भैया! मैं राज्य का अधिकारी न होने के कारण उस राजकर्तव्य के अधिकार से रहित हूँ, अतः राजकर्तव्य विषयक यह उपदेश मेरे किस काम आएगा?॥1॥
 
On hearing Shri Ram's words, Bharata replied thus - 'Brother! Since I am not entitled to the kingdom, I am devoid of the rights of that king's duty, so what will this advice on king's duty be useful to me?॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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