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श्लोक 2.102.1  |
रामस्य वचनं श्रुत्वा भरत: प्रत्युवाच ह।
किं मे धर्माद् विहीनस्य राजधर्म: करिष्यति॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| श्री राम के वचन सुनकर भरत ने इस प्रकार उत्तर दिया - 'भैया! मैं राज्य का अधिकारी न होने के कारण उस राजकर्तव्य के अधिकार से रहित हूँ, अतः राजकर्तव्य विषयक यह उपदेश मेरे किस काम आएगा?॥1॥ |
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| On hearing Shri Ram's words, Bharata replied thus - 'Brother! Since I am not entitled to the kingdom, I am devoid of the rights of that king's duty, so what will this advice on king's duty be useful to me?॥ 1॥ |
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