श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.100.9 
स कच्चिद् ब्राह्मणो विद्वान् धर्मनित्यो महाद्युति:।
इक्ष्वाकूणामुपाध्यायो यथावत् तात पूज्यते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘तात! क्या तुम सदैव धर्म में तत्पर रहने वाले, विद्वान्, विद्वान् ब्राह्मण और इक्ष्वाकुकुल के गुरु, महान् एवं तेजस्वी वशिष्ठजी का पूजन करते हो?’॥9॥
 
‘Tat! Do you always worship the great and brilliant Vashishthaji, the learned, learned Brahman and the teacher of Ikshvakukul, who is always active in religion? 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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