श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.100.8 
कच्चिद् दशरथो राजा कुशली सत्यसंगर:।
राजसूयाश्वमेधानामाहर्ता धर्मनिश्चित:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘अपने धर्म में दृढ़ रहने वाले, राजसूय और अश्वमेध यज्ञ करने वाले, सत्यवादी राजा दशरथ सुरक्षित हैं या नहीं?॥8॥
 
‘Is King Dasharatha, who is steadfast in his religion and who has performed the Rajasuya and Ashwamedha sacrifices, and who is truthful, safe or not?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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