श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.100.71 
मन्त्रिभिस्त्वं यथोद्दिष्टं चतुर्भिस्त्रिभिरेव वा।
कच्चित् समस्तैर्व्यस्तैश्च मन्त्रं मन्त्रयसे बुध॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
हे विद्वान्! क्या तुम चार या तीन मन्त्रियों से नीति के अनुसार एक साथ अथवा पृथक्-पृथक् परामर्श करते हो?॥ 71॥
 
‘Learned one! Do you consult with four or three ministers as prescribed by ethics, either together or with all of them separately?॥ 71॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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