श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.100.7 
कच्चित् सौम्य न ते राज्यं भ्रष्टं बालस्य शाश्वतम्।
कच्चिच्छुश्रूषसे तात पितु: सत्यपराक्रम॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'कोमल ! तुम अभी बालक हो, अतः परम्परा से प्राप्त तुम्हारा राज्य नष्ट नहीं हुआ ? सत्यपराक्रमी तत् भारत ! तुम अपने पिता का ध्यान रखते हो न ? 7॥
 
'Gentle! You are still a child, so your kingdom inherited from tradition has not been destroyed? Satyaprakrami Tat Bharat! You take care of your father, right? 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)