vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 100: श्रीराम का भरत को कुशल-प्रश्न के बहाने राजनीति का उपदेश करना
»
श्लोक 64
श्लोक
2.100.64
कच्चित् ते ब्राह्मणा: शर्म सर्वशास्त्रार्थकोविदा:।
आशंसन्ते महाप्राज्ञ पौरजानपदै: सह॥ ६४॥
अनुवाद
महाप्रज्ञ! सम्पूर्ण शास्त्रों के अर्थ जानने वाले ब्राह्मण और जनपदवासी आपका कल्याण चाहते हैं न? 64॥
‘Mahapragya! The Brahmins, who know the meaning of all the scriptures, and the people of the district, wish for your welfare, don't they? 64॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd